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भगवान ने दृष्टि छीन ली तो और कला भरपूर दे दी – दिव्यांग भाई बहिन की कहानी।

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कहते हैं हौसले अगर बुलन्द हो तो आसमान में भी सुराख किया जा सकता है कुछ इन्ही हौसलो को समेटे दिव्यांग और गरीब परिवार के दो भाई और एक बहन आज भी संघर्षो से जूझकर कला और संस्कृति के क्षेत्र में अपने हुनर की एक नजीर पेश कर रहे है।

भगवान सिंह पौड़ी


-दिव्यांग होने के बाद भी किस्मत को मात देता ये दिव्यांग और गरीब परिवार पौड़ी जनपद के कोटमण्डल गांव का रहने वाला है बचपन में ही दो भाई और एक बहन जन्म से ही दृष्टिहीन है, इसके बावजूद इसे अपनी कमजोरी न मानते हुए अपनी ताकत बनाने वाले निर्मल उनकी बहन और उनका एक भाई आज भी अपने संघर्ष की दर्द भरी कहानी को भी बयां करते हैं संस्कृति और कला में संघर्ष कर रहे निर्मल उनकी बहन और एक भाई का हुनर गीत संगीत के क्षेत्र में कमाल का है दिव्यांग भाई निर्मल के हाथो में माने जहाँ साक्षात् सरस्वती का वाश हो जिनकी कला हारमोनियम और बांसुरी बजाने में साफ़ दिखती है तो वहीँ बहन की सुरीली आवाज मन छू जाती है जबकि एक और दष्टिहीन भाई इन्ही गीतों में ताल देता है पर्यावरण को बचाने जैसे गीत संगीतो के साथ उत्तराखण्ड की पौराणिक संस्कृति को बचाने के लिये ये परिवार आज भी संघर्ष कर रहा है हालांकि संस्कृति के क्षेत्र में काम कर रहे इन दष्टिहीन परिवारो पर अब तक प्रदेश सरकार की नजर नही पडी है जिससे इनके बेहतर मुकाम हासिल करने के सपने आज भी सपने ही हैं बावजूद इसके इनका ये संघर्ष अब भी जारी है बड़े भाई निर्मल गीत संगीत के साथ ही रेडियो में क्रिकेट और टीवी में क्रिकेट मैच की इंग्लिश कॉमेंट्री सुनकर इंग्लिश कॉमेंट्री अब आसानी से बखूबी कर लेता है साथ ही देश और विदेश में होने वाले कॉमेंट्री में आसानी से फर्क भी बता देता है इसके साथ ही कई कर्तव ये दिव्यांग जन आसानी से कर लेते हैं।

कला और संस्कृति के क्षेत्र में अपना हौसला कायम रखने वाले इन दिव्यांग भाई बहनो को समाज कल्याण विभाग से 1000 रूपये प्रति व्यक्ति के तौर पर पेंशन मिलती है लेकिन इससे इनका भरण पोषण होना सम्भव नही इसलिए परिवार आज भी संघर्षो से आगे बढ़ने के लिए जी तोड़ प्रयास कर रहा है आँखों की रौशनी खो चुके इस परिवार ने देशहित में कार्य करने के सपने भी पिरोहे थे लेकिन शायद ये कुदरत को मंजूर न था दिव्यांग जनो की देखरेख इनके पिता करते हैं लेकिन गरीबी और आर्थिक तंगी इस परिवार का पीछा नही छोड़ रही दिव्यांगों के इस हुनर और प्रतिभा की सुध सरकार ले कर इन्हें बेहतर मंच दिला सके इसके लिए गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत के संज्ञान में दिव्यांगों के संघर्ष को बयां किया गया तो गढ़वाल सांसद ने बताया की वे इस गांव का दौरा कर चुके है और दिव्यांगों के हुनर से भी अच्छी तरह से वाकिफ हैं सांसद ने बताया की इनकी शिक्षा के साथ ही इन्हें रोजगार देने के लिए वे प्रयास करेंगे साथ ही प्रदेश सरकार का ध्यान भी इस परिवार की ओर लाएंगे।




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