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घर पर बात करना भी मुश्किल, अंधेरे में कब बाघ उठा ले जाय, चिंतित रहते है रोजगार के लिए बाहर निकले युवा।

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21 वी सदी में दुनिया चांद पर घर बसाने की तैयारी में है तो उत्तराखंड के कुछ गाँव अभी भी चांद की रोशनी में चौपाल लगा रहे है, बर्फवारी के बाद गाँव अंधेरे में डूबे हुए है , मोबाइल नेटवर्क बंद है तो आवागमन भी आसान नही ऐसे में एक बार फिर सरकार और चुने हुए प्रतिनिधियो से ग्रामीणों ने उनकी सुध लेने की गुहार लगाई है।

उत्तरकाशी जिले के उपला गाजना क्षेत्र के ठन्डी गवं ओर कुमारकोट ओर जालंग ओर कामद ओर बारम्पुरी ओर भाडकोट में 1 सप्ताह से न तो बिजली है और न मोबाइल नेटवर्क ? 21 वी सदी में जा रही दुनिया को ग्रामीण कोस रहे है ।

यही आलम भटवाड़ी ब्लॉक के पिलंग और जौड़ाऊ गाँव का है, बॉर्डर से लगे इस इलाके में बर्फवारी लोगो के लिए आफत बन गयी है, आवागमन मुश्किल है रात अंधेरे भरी है तो संपर्क के लिए कोई कनेक्टिविटी उपलब्ध नही है, सड़क से दूरी के चलते गाँव के हालात मोबाइल में भी कैद नही हो सके, अब बिजली हो तो मोबाइल काम करे, ग्राम प्रधान पिलंग अतर सिंह ने भी ग्रामीणों की पीड़ा पत्र के माध्यम से उजागर की है।

डिजिटल इंडिया बनाने की दौड़ में लगातार पिछड़ रहे इस क्षेत्र में तो 1 सप्ताह से न बिजली न मोबाइल नेटवर्क । चंडीगढ़ में पेशे से होटल व्यवसायी सोवन सिंह ने सभी क्षेत्रवासियों की ओर से डीएम उत्तरकाशी , विधायक गंगोत्री से विनती की है कि हमारे क्षेत्र में शीघ्र बिजली और नेटवर्क की सुविधा को उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे लोग कम से कम आपने घर वालो से फोन पर तो बात चीत कर सके। उन्होंने कहा कि वे लोग रोजगार के लिए घर से बाहर है ।




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